वही शागिर्द हैं जो!

अदब ता’लीम का जौहर है ज़ेवर है जवानी का,
वही शागिर्द हैं जो ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं|

चकबस्त ब्रिज नारायण

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