मिरे दिल जिगर में समा भी जा रहे क्यों नज़र का भी फ़ासला,
कि तिरे बग़ैर तो जान-ए-जाँ मुझे ज़िंदगी भी मुहाल है|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
मिरे दिल जिगर में समा भी जा रहे क्यों नज़र का भी फ़ासला,
कि तिरे बग़ैर तो जान-ए-जाँ मुझे ज़िंदगी भी मुहाल है|
मजरूह सुल्तानपुरी
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