ज़िंदगी का सवाल है!

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तिरे सामने मिरा हाल है,

तिरी इक निगाह की बात है मिरी ज़िंदगी का सवाल है|

मजरूह सुल्तानपुरी

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