तस्वीर बनाने से रही!

चंद लम्हों को ही बनती हैं मुसव्विर* आँखें,

ज़िंदगी रोज़ तो तस्वीर बनाने से रही|

*चित्रकार

निदा फ़ाज़ली

Leave a comment