दफ़ीने देख लेता हूँ!

खड़ा हूँ यूँ किसी ख़ाली क़िले के सेहन-ए-वीराँ में,

कि जैसे मैं ज़मीनों में दफ़ीने* देख लेता हूँ|

*गड़े , दफनाए हुए, खजाने

मुनीर नियाज़ी

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