रुस्वा हो तो ऐसा हो!

ऐ क़ैस-ए-जुनूँ-पेशा ‘इंशा’ को कभी देखा,
वहशी हो तो ऐसा हो रुस्वा हो तो ऐसा हो|

इब्न-ए-इंशा

Leave a comment