कहीं ग़म की आग घुला न दे!

मिरे साथ चलने के शौक़ में बड़ी धूप सर पे उठाएगा,
तिरा नाक नक़्शा है मोम का कहीं ग़म की आग घुला न दे|

बशीर बद्र

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