इन्हें नफ़रतों की हवा न दे!

नए दौर के नए ख़्वाब हैं नए मौसमों के गुलाब हैं,
ये मोहब्बतों के चराग़ हैं इन्हें नफ़रतों की हवा न दे|

बशीर बद्र

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