तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में!

ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त,
वो तेरी याद में हों या तुझे भुलाने में|

फ़िराक़ गोरखपुरी