सोया भी नहीं था कि जगाने निकले!

वो सितम-केश बहर-ए-हाल सितम-केश रहे,
दर्द सोया भी नहीं था कि जगाने निकले|

रज़ा अमरोहवी

2 responses to “सोया भी नहीं था कि जगाने निकले!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji

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