‘मीर’ का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी!

उठता है दिल-ओ-जाँ से धुआँ दोनों तरफ़ ही,
ये ‘मीर’ का दीवान यहाँ भी है वहाँ भी|

निदा फ़ाज़ली

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