दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं!

ख़ूँ-ख़्वार दरिंदों के फ़क़त नाम अलग हैं,
हर शहर बयाबान यहाँ भी है वहाँ भी|

निदा फ़ाज़ली

Leave a comment