इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी!

हिन्दू भी सुकूँ से है मुसलमाँ भी सुकूँ से,
इंसान परेशान यहाँ भी है वहाँ भी|

निदा फ़ाज़ली

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