मंज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं!

एक इक कर के हुए जाते हैं तारे रौशन,
मेरी मंज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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