रात को रो रो सुब्ह किया!

याँ के सपीद ओ सियह में हम को दख़्ल जो है सो इतना है,
रात को रो रो सुब्ह किया या दिन को जूँ तूँ शाम किया|

मीर तक़ी मीर

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