ये चीज़ तो ख़ैर अब सस्ती है!

दिल जैसा अन-मोल रतन तो जब भी गया बे-राम गया,
जान की क़ीमत क्या माँगें ये चीज़ तो ख़ैर अब सस्ती है|

राही मासूम रज़ा

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