लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाए!

हमसे पूछो कि ग़ज़ल क्या है ग़ज़ल का फ़न क्या,
चंद लफ़्ज़ों में कोई आग छुपा दी जाए|

जाँ निसार अख़्तर

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