रात सपना बहार का देखा!

रात सपना बहार का देखा दिन हुआ तो ग़ुबार सा देखा,
बेवफ़ा वक़्त बेज़ुबाँ निकला बेज़ुबानी को नाम क्या दें हम|

सुदर्शन फ़ाकिर

Leave a comment