कि ख़ुद ही शम्मा बुझ गई!

मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शम्मा बुझ गई,
गिलास ग़ुम शराब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी|

सुदर्शन फ़ाकिर

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