इस जवानी को नाम क्या दें हम!

आपको यूँ ही ज़िन्दगी समझा धूप को हमने चाँदनी समझा,
भूल ही भूल जिसकी आदत है इस जवानी को नाम क्या दें हम|

सुदर्शन फ़ाकिर

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