
तू शरीक-ए-सुख़न नहीं है तो क्या,
हम-सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी|
नासिर काज़मी
A sky full of cotton beads like clouds

तू शरीक-ए-सुख़न नहीं है तो क्या,
हम-सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी|
नासिर काज़मी
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