ख़ुदाओं को बे-नक़ाब करूँ!

मुझे बुतों से इजाज़त अगर कभी मिल जाए,
तो शहर-भर के ख़ुदाओं को बे-नक़ाब करूँ|

राहत इन्दौरी

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