हमको जुनूँ क्या सिखलाते हो!

हमको जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़ियादा,
चाक किए हैं हमने अज़ीज़ो चार गरेबाँ तुम से ज़ियादा|

मजरूह सुल्तानपुरी

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