जश्न-ए-चराग़ाँ तुम से ज़ियादा!

जाओ तुम अपने बाम की ख़ातिर सारी लवें शम्ओं की कतर लो,
ज़ख़्म के मेहर-ओ-माह सलामत जश्न-ए-चराग़ाँ तुम से ज़ियादा|

मजरूह सुल्तानपुरी

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