तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है !

तुझे भूल जाने की कोशिशें कभी कामयाब न हो सकीं,
तिरी याद शाख़-ए-गुलाब है जो हवा चली तो लचक गई|

बशीर बद्र

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