
अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता,
न कुछ मरने का ग़म होता न जीने का मज़ा होता|
चकबस्त बृज नारायण
A sky full of cotton beads like clouds

अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता,
न कुछ मरने का ग़म होता न जीने का मज़ा होता|
चकबस्त बृज नारायण
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