रवाँ-दवाँ हैं चमकते सराब के!

बस तिश्नगी की आँख से देखा करो उन्हें,
दरिया रवाँ-दवाँ हैं चमकते सराब* के|
*मृगतृष्णा
आदिल मंसूरी

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