
ख़यालों के तारीक खंडरात में,
ख़मोशी ग़ज़ल गुनगुनाने लगी|
आदिल मंसूरी
A sky full of cotton beads like clouds

ख़यालों के तारीक खंडरात में,
ख़मोशी ग़ज़ल गुनगुनाने लगी|
आदिल मंसूरी
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