बे-वुज़ू ही सही!

न तन में ख़ून फ़राहम न अश्क आँखों में,
नमाज़-ए-शौक़ तो वाजिब है बे-वुज़ू ही सही|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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