
अहल-ए-दिल सहरा में गुम होते रहे,
ज़िंदगी बैठी रही पर्दा किए|
राही मासूम रज़ा
A sky full of cotton beads like clouds

अहल-ए-दिल सहरा में गुम होते रहे,
ज़िंदगी बैठी रही पर्दा किए|
राही मासूम रज़ा
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