जब दिन और रात बराबर हो!

अब ‘इंशा’-जी को बुलाना क्या अब प्यार के दीप जलाना क्या,
जब धूप और छाया एक से हों जब दिन और रात बराबर हो|

इब्न ए इंशा

Leave a comment