मय-ख़ाना तेरे शहर में!

लाई फिर इक लग़्ज़िश-ए-मस्ताना तेरे शहर में,
फिर बनेंगी मस्जिदें मय-ख़ाना तेरे शहर में|

कैफ़ी आज़मी

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