ख़लीफ़ा की खोपड़ी!

एक बार फिर मैं प्रमुख हास्य व्यंग्य कवि और श्रेष्ठ मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक हास्य-व्यंग्य कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता –


दर्शकों का नया जत्था आया
गाइड ने उत्साह से बताया—
ये नायाब चीज़ों का
अजायबघर है,
कहीं परिन्दे की चोंच है
कहीं पर है।
ये देखिए
ये संगमरमर की शिला
एक बहुत पुरानी क़बर की है,
और इस पर जो बड़ी-सी
खोपड़ी रखी है न,
ख़लीफा बब्बर की है।
तभी एक दर्शक ने पूछा—
और ये जो
छोटी खोपड़ी रखी है
ये किनकी है ?
गाइड बोला—
है तो ये भी ख़लीफ़ा बब्बर की
पर उनके बचपन की है।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********

2 responses to “ख़लीफ़ा की खोपड़ी!”

  1. बहुत अच्छा

    Like

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

      Like

Leave a comment