मेहनत का दाम हो गई है!

हज़ारों आँसुओं के बअ’द इक ज़रा सी हँसी,
किसी ग़रीब की मेहनत का दाम हो गई है|

राजेश रेड्डी

2 responses to “मेहनत का दाम हो गई है!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji

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