अहेरी!

आज बारी है प्रसिद्ध कवि और नवगीतकार स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी की, आज मैं उनकी एक कविता शेयर कर रहा हूँ|

लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी की यह कविता –


नोकीले तीर हैं अहेरी के
कांटे खटिमट्ठी झरबेरी के
टांग चली शोख
तार तार हुआ पल्लू
अंगिया पर बैरी सा
भार हुआ पल्लू
मीठे रस बैन गंडेरी के
झरबेरी आंखों में
झलकी बिलबौटी
खनक उठी नस नस में
काटती चिकौटी
बाल बड़े जाल हैं मछेरी के
चोख चुभन
गोद गयी
पोर पोर गुदना
अंगुली पर नाच रहा
एक अदद फुंदना
चकफेरे छोड़ सातफेरी के


(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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