ये शराफ़तें नहीं बे-ग़रज़!

यूँही रोज़ मिलने की आरज़ू बड़ी रख-रखाव की गुफ़्तुगू ,
ये शराफ़तें नहीं बे-ग़रज़ इसे आप से कोई काम है|

बशीर बद्र

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