ये कलाम किसका कलाम है!

कोई नग़्मा धूप के गाँव सा कोई नग़्मा शाम की छाँव सा,
ज़रा इन परिंदों से पूछना ये कलाम किसका कलाम है|

बशीर बद्र

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