
ऐ नज़ारो न हँसो मिल न सकूँगा तुमसे,
तुम मिरे हो न सके मैं भी तुम्हारा न रहा|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds

ऐ नज़ारो न हँसो मिल न सकूँगा तुमसे,
तुम मिरे हो न सके मैं भी तुम्हारा न रहा|
मजरूह सुल्तानपुरी
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