फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं!

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं,
ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं|

जावेद अख़्तर

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