वो बयान शौक़ का बरमला!

कभी बैठे सब में जो रू-ब-रू तो इशारतों ही से गुफ़्तुगू ,
वो बयान शौक़ का बरमला तुम्हें याद हो कि न याद हो|

मोमिन खाँ मोमिन

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