
शाम की ना-समझ हवा पूछ रही है इक पता,
मौज-ए-हवा-ए-कू-ए-यार कुछ तो मिरा ख़याल भी|
परवीन शाकिर
A sky full of cotton beads like clouds

शाम की ना-समझ हवा पूछ रही है इक पता,
मौज-ए-हवा-ए-कू-ए-यार कुछ तो मिरा ख़याल भी|
परवीन शाकिर
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