
ज़िंदा हूँ मगर ज़ीस्त की लज़्ज़त नहीं बाक़ी,
हर-चंद कि हूँ होश में हुश्यार नहीं हूँ|
अकबर इलाहाबादी
A sky full of cotton beads like clouds

ज़िंदा हूँ मगर ज़ीस्त की लज़्ज़त नहीं बाक़ी,
हर-चंद कि हूँ होश में हुश्यार नहीं हूँ|
अकबर इलाहाबादी
Leave a comment