
चेहरा था या सदा थी किसी भूली याद की,
आँखें थीं उसकी यारो कि दरिया-ए-नूर था|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds

चेहरा था या सदा थी किसी भूली याद की,
आँखें थीं उसकी यारो कि दरिया-ए-नूर था|
मुनीर नियाज़ी
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