
क्या सोच के तुम ने सींची थी ये केसर क्यारी चाहत की,
तुम जिनको हँसाने आए थे उनको न रुलाओ इंशा-जी|
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds

क्या सोच के तुम ने सींची थी ये केसर क्यारी चाहत की,
तुम जिनको हँसाने आए थे उनको न रुलाओ इंशा-जी|
क़तील शिफ़ाई
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