
क़तरे वो कुछ भी पाएँ ये मुमकिन नहीं ‘वसीम’,
बढ़ना जो चाहते हैं समुंदर-कशी के साथ|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

क़तरे वो कुछ भी पाएँ ये मुमकिन नहीं ‘वसीम’,
बढ़ना जो चाहते हैं समुंदर-कशी के साथ|
वसीम बरेलवी
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