
जाने कब शहर के रिश्तों का बदल जाए मिज़ाज,
इतना आसाँ तो नहीं लौट के घर आना भी|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

जाने कब शहर के रिश्तों का बदल जाए मिज़ाज,
इतना आसाँ तो नहीं लौट के घर आना भी|
वसीम बरेलवी
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