
ख़्वाब-दर-ख़्वाब था जो शीराज़ा,
अब कहाँ है बिखर गया कब का|
जावेद अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds

ख़्वाब-दर-ख़्वाब था जो शीराज़ा,
अब कहाँ है बिखर गया कब का|
जावेद अख़्तर
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