
अपना चेहरा निहार लें ऋतुएँ,
आईनों की तरह जड़े हैं पेड़|
सूर्यभानु गुप्त
A sky full of cotton beads like clouds

अपना चेहरा निहार लें ऋतुएँ,
आईनों की तरह जड़े हैं पेड़|
सूर्यभानु गुप्त
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