
मय-कदों के भी होश उड़ने लगे,
क्या तिरी आँख की जवानी है|
फ़िराक़ गोरखपुरी
A sky full of cotton beads like clouds

मय-कदों के भी होश उड़ने लगे,
क्या तिरी आँख की जवानी है|
फ़िराक़ गोरखपुरी
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