
क़द से बढ़ जाए जो साया तो बुरा लगता है,
अपना सूरज वो उठा लेता है हर शाम के बाद|
कृष्ण बिहारी ‘नूर’
A sky full of cotton beads like clouds

क़द से बढ़ जाए जो साया तो बुरा लगता है,
अपना सूरज वो उठा लेता है हर शाम के बाद|
कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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